Saturday, 1 November 2008

मुसाफिर

जो सफ़र अख्तियार करते है,
वही मंजिल को पार करते है.
बस एक बार चलने का हौसला तो रखिये,
ऐसे मुसाफिर का तो रस्ते भी इंतज़ार करते है

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