Wednesday, 11 May 2016

बचपन की यादें

पिछले कई दिनों से अपने गुजरे हुए कल की यादें जेहन में आ रही है।  खुद ही बैठे बैठे हसने लगता हु, कुछ चीजों को याद कर दुःख भी होता है. कुल मिलकर कर देखू तो बचपन बहुत ही eventful रहा  बोले तो रोचक रहा है।  शायद आज के बच्चों को वो हसीं पल नसीब न हो पाएगा।  एक प्रयास करना चाहता हुँ।  अपने बचपन की उन साड़ी यादो को समेटना चाहता हूँ और साथ ही साथ इंटरनेट की इस बृहत् दुनिया में सबके सामने  रखना चाहता हूं।  शायद कुछ लोग अपने आप को उन स्मृतिओं से जोर पाएंगे और उसी बहने अपने बचपन को याद कर खुश हो पाएंगे।  अगर मेरे जीवन की इन स्मृतिओं को पढ़ कर किसी के भी चेहरे पे एक छोटी सी मुश्कान आ जाएगी तो खुद को बहुत धनि मानूंगा। कुछ ऐसी भी समृत्य भ होंगी जिन्हे बयां करने में मुझे संकोच होगी , शायद ये सोच कर की लोग क्या सोचेंगे और क्या राय बनाएंगे मेरे बारे में. लेकिन i  थिंक i  हैवे तो मूव ऑन फ्रॉम व्हाट पीपल थिंक।   हिंदी में लिखना थोड़ा  कठिन हो गया है।  पहले अंग्रेजी  के नाम से हवा टाइट हो जाती थी।  अब हिंदी में लिखने और सोचने में कठिनाई होती है।  देखें तो ये उन्नति का असर है लेकिन अगर समझे तो महसूस होगा की अपनी ही भाषा से दूर होते गए है और उसको प्रोग्रेस का नाम दे रहे है।  बहुत कठिन है ये justify  करना की हमने उन्नति की या अवनति।  खैर ये सब मन का अंतार्द्वन्द है।  यह सदैव चलता ही रहेगा - क्या खोया क्या पाया।  आसमान में उड़ने की ख्वाहिश थी।  उड़ते उड़ते इतने ऊपर आ गए की ज़मीन धुंधली हो गई।  पहले रिश्तों को enjoy करते थे।  अब किसी तरह निभाने की कोशिश।  शायद ये भी वो एक कोशिश है।  जगजीत सिंह जी आज हमारे बिच नहीं रहे।  लेकिन कॉलेज के समय सुने गए उनकी कुछ ग़ज़लों के बोल आज भी कानो में गूंजते है - ये दौलत भी लेलो , ये सोहरत भी लेलो, चाहे चिन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो मेरा वो बचपन , वो कागज को कश्ती , वो बारिश का पानी।  शायद उनको ये बातें बहुत पहले समझ में आ गई थी।  आज तक एकांत में लिखता था , सर्फ अपने लिए, लेकिन अब ये प्रयास है की सब तक अपनी कहानी पहुंचो, शायद कुछ लोग मेरी कहानी में, मेरे बचपन में अपना बचपन देख ले, याद कर ले।  बहुत उत्साह और समय की जरुरत होगी।  बहुत ही ज्यादा सहयोग और प्रोत्साहन चाहिए होगा।  अगर मेरी इन पंक्तिओं में से कोई एक शब्द भी आपको छू जाये तो जरूर उत्साहित करियेगा।  आपके कमेंट्स पढ़कर प्रोत्साहन होगा , लगेगा की शायद बचपन का कोई भुला बिसरा दोस्त मिल गया। 

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